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२२१२   २२१२     २२१२    १२१२

दरवेश के हर हुजरे से अब मेहमां हटाइए
जो लाश ले चलती गरीबी,दरमियाँ हटाइए

बार-ए-गिरेबा को कलफ न मिले जहाँ नसीब में
तहजीब  की अब उस कमीज से गिरेबां हटाइए

ये है निजाम तेरा, सफीना सोच कर उतारना
चलती हवा दरिया से बे-मकसद तुफां हटाइए

उनको बिछा दो मखमली कालीन मगर साहेब
उम्मीद  की बुनियाद हों काटे, वहाँ  हटाइए

जाने कोई क्यों खटकता है आँख में दबा-दबा
अब हो सके मायूस  नजरें  अँखियाँ हटाइए

सुशील यादव
१.९.१६

दरवेश =saint
हुजरे=private chamber
बार-ए-गिरेबाँ-weight of coller ऑफ़ शर्ट
निजाम = व्यवस्था ,सफीना=नाव



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