२२१२ २२१२ २२१२ १२
लम्हा नहीं ऐसा कोई,सजदा नहीं किया
कोई मंजिल तेरे सिवा, देखा नहीं किया
चौखट जहाँ,माथा नवा सब मांगते रहे
हमने नबी तुझसे कभी मागा नहीं किया
देना अगर होता दे देते बस सुकून ही
दौलत तिजौरी में कभी चाहा नहीं किया
इस कौम की हो दांव में इज्जत व आबरू
इस कौम के लोगों ने बस सोचा नहीं किया
अदब से लिया महफिल में तेरा नाम सोचिये
तुझको भरी महफिल कभी रुसवा नही किया
लम्हा नहीं ऐसा कोई,सजदा नहीं किया
कोई मंजिल तेरे सिवा, देखा नहीं किया
चौखट जहाँ,माथा नवा सब मांगते रहे
हमने नबी तुझसे कभी मागा नहीं किया
देना अगर होता दे देते बस सुकून ही
दौलत तिजौरी में कभी चाहा नहीं किया
इस कौम की हो दांव में इज्जत व आबरू
इस कौम के लोगों ने बस सोचा नहीं किया
अदब से लिया महफिल में तेरा नाम सोचिये
तुझको भरी महफिल कभी रुसवा नही किया
सुशील यादव
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