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कोलकी-कोलकी हमला भइय्या,
लोगन कहिथे अलख जगइय्या

हमन सुराज सपना देखेन
हमू शान बघारे हन
रोवत-रोवत जउने आइन
हाँसत-हाँसत तारे हन
ऐ बस्ती ले ओ बस्ती
सबो के पाँव पखारे हन

उज्जर गोड़ के लोगन जाने
हमला केवट पाँव धोवैय्या ...

जिहां दिखिस अंधियार हमला
उहचे दिया  बार के आएन
जिहां मिलिस अन्याय बघवा
उही करा बने ठठाएन
कहु भुलाय के
एखर सेती चीन्ह के रखहु
 





हमन सुराज सपना देखेन
हमू शान बघारे हन
रोवत-रोवत जउने आइन
हाँसत-हाँसत तारे हन
ऐ बस्ती ले ओ बस्ती
सबो के पाँव पखारे हन

उज्जर गोड़ के लोगन जाने
हमला केवट पाँव धोवैय्या ...

जिहां दिखिस अंधियार हमला
उहचे दिया  बार के आएन
जिहां मिलिस अन्याय बघवा
उही करा बने ठठाएन
दू-दू हाथ करे बर बैरी

कहु भुलाय के
एखर सेती चीन्ह के रखहु
 


टुटहा पनही गोड़ हमर, कतको दुरिहा रेंगे हन
सुरुज सुराजे सपनावत,भुइयां ऐदे तारे हन

बरय दिवाली के दिया,नइये कछु अंजोर
करिया-करिया कस दिखे,टिकली-विकली तोर


चलती चक्की देखकर ,रोया कभी कबीर
आज उसी दम चाकरी ,हैं कुछ लोग अमीर
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पाये प्रभु हम आपसे ,कितने भी दुत्कार
हम आखिर में जानते,होना है उपकार
#
लेकर मन की आस्था ,चढ़ा रहे हैं फूल
सदा यही माथा लगे ,मिटटी-चन्दन धूल
#
मन के भीतर बोलता ,साधु !साधु सा बोल
पर बाहर आ पीटता ,अहंकार के ढोल
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लोहाटी हे तारा तो लगा देबे जी
सुन्ना घर के किचकिच ओधा देबे जी

अलग -अलग शब्द चित्र  ...
2212  2212  122
तरुआ तहीं अपने ठठाय  होबे
चांउर बिना अंधन चढाय होबे

समधी मिले हे अंगठा लगइया
बेटी पढ़ंतिन कस पठाय होबे

गइया ल ये जनम ओतके ठठाबे
समझे के  आगू जनम गाय होबे

पन्दोली ले बर कहुँ  मितान पाते
अपनेच शान बड़  इतराय होबे

पाछु बरस कोन सुरता हवे का
खेती -किसानी म जम्हाय होबे

सुशील यादव
अन्नकूट
20.10.17

अलग -अलग शब्द चित्र  ...

तरुआ तहीं अपने ठठाय  होबे
चांउर बिना अंधन चढाय होबे

समधी मिले हे अंगठा लगइया
बेटी पढ़ंतिन कस पठाय होबे

गइया ल ये जनम ओतके ठठा
समझ आगू जनम ते गाय होबे

पन्दोली देवइया तहु ल मिलतिस
अपनेच शान बड़  इतराय होबे

पाछु बच्छर के  सुरता हवे का
खेती -किसानी कभू जम्हाय होबे

सुशील यादव
अन्नकूट
20.10.17




2212  2212 212
संभावना ...

भीतिया भरोसा के भसक जाहि का
रखवार कहुँ टोटा मसक जाहि का

फोड़ेच बर नोहे फटाका सबो
आदेश के बघवा हबक जाहि का

सज-धज अपन घर में टुरी ह बइठे
चलते-चलत खानी मटक जाहि का

तै गोठ के गारा मतावत रहे
ओती कथे गाडी रबक जाहि का

माटी दिया  तैं कस जलाबे असो
कम तेल के दियना भभक जाहि का


कोनो उमर कभु खाय- खेलिस नहीं
बाबा बने बुढऊ फदक जाहि का

सुशील यादव
१८ १० १७


तेरस के हो तोहफे ,खुशियां मिले अपार
विनती करे कुबेर से ,भरा रहे भंडार
सुशील यादव


बारे हस दिया करे बर अंजोर
सरपट ले भगैय्या ,महु ल अगोर
चन्दन के घिसैय्या,मंजन घिसय
मंजन के घिसैय्या ,दांत निपोर

ताज ला अंताजे ताज निखर जाहि
रुपिया नोहे चलते-चलत कोंघर जाहि
भरोसा के भीतिया पोठ नइये सन्तरा
को जाने कब बांधे-छाँदे ओदर जाहि
सुशील यादव
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बारे बर टेडगा लकड़ी चल जाहि
खाय बर खीरा ककड़ी चल जाहि
नइ चलहि थोरको सियान के गोठ
सजे सजाय घर में मकड़ी चल जाहि
सुशील यादव


बीड़ी जरहा कान में , सरहा नागर काँध
करे किसानी तहु बने,मरहा बइला फाँद
सुशील यादव
तर-तर पानी टेटकू ,रोके तहीं झिपार
खेत-खार जुच्छा लगय, ठोकत मुड़ी-कपार

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एक निशानी प्यार की .... कब-कब,किस-किस नाम से,होता रहे बवाल एक निशानी प्यार की ,रखो  जरा सम्हाल नहीं खोलते मुँह कभी ,रहते हरदम मौन चल  विकास की बात कर, तुझको रोके कौन शंका उनको खा रही ,थे जो भूखे लोग खाने को मुहताज वे ,परसे छप्पन  भोग सोया है प्रहरी जहां,दुर्घटनाएं देख शासक ही बहरा हुआ,बेमतलब उल्लेख हाथ बचा के तोड़ ले,देख गुलाबी फूल कांटो का मौसम कहीं,आज हुआ अनुकूल तेरे पीछे घूम कर ,हुआ समय बर्बाद नाहक रोना-पीटना,नासमझी फरियाद कांटा ही उपजे वहां ,बोया जहाँ बबूल संयम की हर धारणा ,हो जाती निर्मूल माथे किसने लिख दिया ,स्याही अमिट कलंक राजा कभी न बन सका ,मन से रहता  रंक मजहब का परचम दिखा , खून लगा ये दाग तुम मशाल क्या ढूढते ,लगी हुई जब आग सुशील यादव कोई नहीं अब सामने ,नहीं चुनौती शेष लंका सारी ढह गई  ,बचा नहीं लंकेश पहन मुखौटा बैठना ,करना बस आराम तुमको भाता छीनना ,तुलसी से सिय-राम एक शराफत आइना ,ले के बैठे यार दुनिया रही कराहती ,तुम न कहो बीमार सुशील यादव मंदिर बनना राम का ,आये याद चुनाव बस तत्परता से भरें ,हर माहौल तनाव ...
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