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चाउर बबा के नाती

दू रुपिया चाउर खवा ,बना ड़ारिन अलाल
छत्तीसगोंदा तुम करव ,छत्तीसगढ़  के लाल

खेत किसानी काम बर,कमइय्या कती लान
दारू व्यसन छोड़य सब ,इहों बिहार बनान

चाउर बबा के नाती ,दिखत तुंहर हे मात
ताजा जेवन परस दय ,बासी खात अघात

चाउर बबा के नाती ,अइसन पकड़ो कान
उधार कोनो झन करे ,कोंदा समझ दुकान

चाउर बबा के नाती,अइसन रख मर्याद
गुरहा चीला कस लगे,नुन्छुरहा के स्वाद


सुशील यादव

नुन्छुर कस मोला लगय ,बात-चीत व्यवहार
कस बिताबो पांच बछर, असकट मे सरकार

लिख-लिख ले अरजी घुमन,काखर-काखर द्वार
कोनो कान कहां धरय ,सुनय हमार गोहार

बिहिनिया कुकरा बासत,भूकय  कुकुर हजार
रुई गोजाय कान कस,निभय तुहार -हमार

आम आदमी बस कहव, आमा चुहके दारि
फिर बाद बेहाल करव,मारे-मार तुतारि

सुख के संगवारी हमर ,काबर रहे लुकाय
जउन मिले मिल बांट के ,देवी भोग लगाय

सुशील यादव

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