हिल गई दीवार ....... सुशील यादव ..........
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तंग गली दिल की कभी सजा देते
मुड़ के ज़रा सा तुम मुस्कुरा देते
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कुछ तसल्ली हो रहती सुकून होता
अगर खताओ की मुझे सजा देते
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दिन गिन के काट रहे यहाँ खौफ में
आहट या आने की इत्तिला देते
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हिल गई दीवार पुराने रिश्तों की
नीव को फिर से अब हौसला देते
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तेरे शहर घूम रहा हूँ आवारा
काश ठिकाना, अपना पता देते
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पास बचे हैं बस मंजिलो के निशा
मंजिल तक पहुचने रास्ता देते
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सीख नहीं पाए हमी हुनर कसम से
चाहत के दांव तुझे सिखा देते
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