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आओ कि सफर की अब थकान भूल जाएँ
बहुत हो चुका गमो की मीजान भूल जाएँ
बैठें किसी लुढ़कते पत्थर में जानिबे मंजिल
राह में मिले हादसों की ढलान भूल जाएँ

कुछ रहनुमा अपने कुछ शय अपनी कुछ सामान अपने
पैदा होते ही साथ चले आये गमो के मीजान अपने
मैं खुशी से उसे अपने साथ लिए जाऊंगा
वो जो बिठा रखे हैं अश्कों के दरबान अपने

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