@@ पिता पुत्र से बोलता ,देखो वीर सपूत सायकल तुझे सौप दूँ ,और निकाल सबूत $ सब की है ढपली यहाँ ,सबके अपने राग ढोल-नगाड़े पीटना ,सुर जाए जब जाग $ महसूस नहीं हो हमे ,कतरो ऐसे पंख महा-समर आरंभ हो ,बज जाए फिर शंख $ फिर चुनाव आना हुआ,निकले वन से राम हर बगल है छुरी दबी,रखो काम से काम $ मानवता की आड़ में,दानव रहा दहाड़ अपनी कुटिया ले बचा,बैठा तोड़ पहाड़ फिर तिलक लगे रघुवीर .... अंग-अंग है टूटता,छलनी हुआ शरीर कब छोड़ोग बोलना,अपना है कश्मीर जग सारा अब जानता,'पाक' नही करतूत भीतर से हर आदमी,छिपा हुआ बारूद जिस झंडे की साख हो,अहम सितारा-चाँद आखिर वही झुका-झुका ,शरीफजादा मांद राम -राज दिन वो फिरें ,तरकश हो बिन तीर तुलसी फिर चन्दन घिसय ,तिलक लगे रघुबीर हिम्मत से अब काम लो ,ताकत करो जुगाड़ जिस भाषा जो बोलता ,उसमे करो दहाड़ निर्णय को अब बाँट दो,जहाँ दिखे अतिरेक बीच अधीर धीरज तुम ,चुनना कोई एक परिचय अपना जान लो ,पाकिस्तानी लोग बीमारी उपचार भी ,जान-लेवा हम रोग सठियाये हो पाक जी ,बोलो करें इलाज आतंक की गोद उतर ,चल घुटने ...